Monday, 26 September 2022

Re Kabira 074 - भाग भाग भाग

 --o Re Kabira 074 o--

भाग भाग भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
भाग तेज़ भाग, भाग तेज़ भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
और तेज़ भाग, और तेज़ भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
इधर भाग, उधर भाग, बस भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
गिर फिर उठ, उठ फिर भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
ठोकर से न रुक, चोट से न चूक
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
दिन भर भाग, रात भर भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
चोरी कर भाग, धोखा देकर भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
कुचल कर भाग, धकेल कर भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
धुप में, ठण्ड में, बारिश में भाग
 
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
बीमारी में भाग, लाचारी में भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
भूखे थके भाग, थके भूखे भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
सो जाग खा भाग, खा सो जाग भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
कोई न रोके, कोई न टोके
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
अकेले ही भाग, सबको ले भाग
भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
साँसे उखड़े भाग, टांगे टूटे भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
हँसते रोते भाग, रोते गाते भाग

भाग भाग भाग, भाग भाग भाग
भाग, भाग
कहाँ पहुँचना हैं?, है पता तुझको?
भाग, भाग
क्या छूटा?, है पता तुझको?
भाग भाग
क्या पाया?, है पता तुझको?
भाग क्यूँ भाग, क्यों भाग
भाग क्यूँ भाग, क्यों भाग

न भाग भाग भाग, न भाग भाग भाग
न भाग भाग भाग, न भाग भाग भाग

आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley
@OReKabira

 --o Re Kabira 074 o--

Friday, 2 September 2022

Re Kabira 073 - ख़रोंचे

 --o Re Kabira 073 o--

ख़रोंचे



किसको ज़रूरत है काँटीले तारों की,
वैसे ही बहुत ख़रोंचों के निशाँ है जिश्म पर

किसको चाहिये ख़्वाब भारी चट्टानों से,
ज़िन्दगी की लहरों ने क्या कम तोड़ा है टकरा कर  

किसको जाना धरा की दूसरी छोर तक,
चार कदमों का फासला ही काफी है चलो अगर

किसको उड़ना है आसमान के पार,
बस कुछ बादल चाहिये हैं जो बरसे जम कर

किसको बटोरना है दौलत सारे जहाँ की,
चकाचक की होड़ मे सभी लगे हुये हैं देखो जिधर 

किसको इकट्ठे करने सहानुभूति दिखाने वालों को,
चारों ओर हज़ारों की भीड़ है सारे बुत मगर

किसको चाह है किसी कि दुआ की,
लगता है बद-दुआ ही है जिसका हुआ असर 

किसको सहारा चाहिये मदहोशी का,
ये अभिमान का ही तो नशा है जो चढ़े सर

किसको हिसाब चाहिये हर पल का,
थोड़ा वक़्त तो निकाल सकते हैं साथ एक पहर

किसको लूटना है वाह-वाही सब की,
कभी-कभी तो हम बात कर सकतें हैं तारीफ़ कर

किसको पढ़ना है कवितायेँ शौर्य-सुंदरता की,
बस एक शब्द ही काफी है शुक्रिया-धन्यवाद कर 

किसको ज़रूरत है काँटीले तारों की,
वैसे ही बहुत ख़रोंचों के निशाँ है जिश्म पर



आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley
@OReKabira


 --o Re Kabira 073 o--

Total Pageviews