Monday, 27 January 2020

Re Kabira 047 - अदिति हो गयी १० की

-o Re Kabira 047 o--


अदिति हो गयी १० की

लगती बात यूँही बस कल की, जब आयी थी अदिति गोद पर
लो जी बिटिया हमारी हो गयी १० की, अब भी कूदे मेरी तोंद पर

बन गया था अदिति का दादा, नाम चुना जब आदित ने तुम्हारा
कहती है आदित को दादा, तुम्हारी दादागिरी पर कुछ करे न बेचारा

आयी तो थी बन कर छोटी गुड़िया, पर निकली सबकी नानी
हो तुम ४ फुट की पुड़िया, करे मनमानी जाने बात अपनी  मनवानी

कभी गुस्से में कभी चिड़चिड़ के, हम डरते हैं गुबार से तुम्हारी
कभी चहकती कभी फुदकती, हर तरफ गूंजे खिलखिलाहट तुम्हारी

आदित की दिति मम्मा की डुइया, पापा को लगती सबसे दुलारी 
दादा-दादी-नानी की अदिति रानी, शैतानी लगे सबको तुम्हारी प्यारी

क्यों इतनी जल्दी बढ़ रही हो भैया, थोड़ा रुक जाओ अदिति मैया
लो जी बिटिया हमारी हो गयी १० की, अब भी कूदे मेरी तोंद पर भैया 

*** आशुतोष झुड़ेले  ***


-o Re Kabira 047 o--

Thursday, 16 January 2020

Re Kabira 046 - नज़र


-o Re Kabira 046 o--



नज़र 

मुश्किलों की फ़ितरत है, आती ही हैं नामुनासिब वक़्त पर
अरे रफ़ीक गलत तो है, थिरका भी है कभी तुम्हारी नज़्म पर

होठों  पर हो वो ग़ज़ल, जो ले जाती थी तुम्हें आसमान पर
मुसीबतें नहीं हैं ये असल, वो ले रही इम्तेहाँ यारों पर

डरते है हम सोच कर, नज़र लग गई ख़ुशियों पर 
बोले रे कबीरा क्या कभी लगी, ख़ुदा की नज़र बंदे पर

*** आशुतोष झुड़ेले  ***

--o Re Kabira 046 o--

Wednesday, 15 January 2020

Re Kabira 045 - सोच मत बदल लेना

--o Re Kabira 045 o--


सोच मत बदल लेना

यदि कभी आ कर मेरे हाल पूँछ लिए, तो मेरी हंसी को ख़ुशी मत बता देना 
हम भी जब आयें मिज़ाज़ पूछने आपके, हमारी गुज़ारिश को फ़रियाद मत कहना  

बोले कबीरा वक़्त नाज़ुक़ नहीं होता, कभी उसकी नज़ाक़त हरकतों पर ग़ौर तो करो
न कत्थक को नाही कथा पर ध्यान हो, दाद हर थिरकन पर टूटे घुंघरूओं को दो

नदी की तक़दीर पता है रहीम को, चंचलता को तुम आज़ादी मत समझ लेना 
समुन्दर शोर नहीं करता अपने ज़र्फ़ का, उसके सुकुत को ख़ामोशी मत कह देना

जो सुना तूने वो किसी के ख़याल हैं, हक़ीक़त समझने की गलती मत कर लेना 
जो दिखा तुम्हे वो तुम्हारा नज़रिया है, सच समझ अपनी सोच मत बदल लेना 

*** आशुतोष झुड़ेले  ***

--o Re Kabira 045 o--

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