Monday, 29 February 2016

Re Kabira 012 - Relationships

--o Re Kabira 012 o--
Relationship

रिश्ता
सब को चाहिये आप से कुछ, आप को चाहिये सब कुछ।
कमी नहीं है रिश्तों में, नहीं है कच्ची यारी।

नहीं करिओ किसी से अपेक्षा, न ही करो किसी की उपेक्षा।
केवल सोच से कुछ नहीं, कर्म ही है सब कुछ।

गलती किस में देखे हो, ऊँगली उठाने से पहले सोचे हो।
एक तेरी दूजी पाथर के ओर, पर तीन टटोले हथेली होर।

आप जो दे चले सब कुछ, मिल जाएगा सत्य सुख।
सब को चाहिये आप से कुछ, आप को चाहिये सब कुछ।

-- आशुतोष

--o Re Kabira 012 o--
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#expectations #neglect 

Monday, 22 February 2016

Re Kabira 011 - Stubborn

--o Re Kabira 011 o--
 
महात्मा पंडित क़ादरी दे गया और बाबा ठाकुर दलित ।
चाचा के तब मजे थे और अब ताऊ-नेता-बहन-बहु के ।।
लोग कल भी अकड़े थे और आज भी चौड़े हैं ।
हम पहले भी मंद थे और अब भी मूरख हैं ।।

Translation: Mahatma supported nation to be divided on basis of religion, Ambedkar divided on the basis of reservation. Politicians took advantage at all times using policy of divide & rule. And supporter followed them stubbornly without using any common sense at all.

Ashutosh Jhureley 

--o Re Kabira 011 o--
#caste #class #religion #region #equality #bias 

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