Wednesday, 29 December 2021

Re Kabira 0062 - पतझड़ के भी रंग होते हैं

--o Re Kabira 062 o--

पतझड़ के भी रंग होते हैं

 पतझड़ के भी रंग होते हैं 

शहर की भीड़ में भी कुछ कोने अकेले बैठने के होते हैं 

सीधी सड़कों से भी कुछ आड़े-तिरछे रास्ते जुड़े होते हैं 

आधी-अँधेरी रात में भी हज़ारों तारे जगमगाते रहते हैं 

लाल-पीले पत्तों में ही सही पतझड़ के भी रंग होते हैं 


धूल भरी किताबों में भी कुछ पन्ने हमेशा याद होते है 

धीमे क़दमों की आहट में भी शरारती छल होते हैं 

पुराने गानों की धुन में भी कुछ किस्से जुड़े होते हैं 

बाग़ीचे में गिरे फूलों में ही सही पतझड़ के भी रंग होते हैं


तुम्हारी मुस्कुराहट में कुछ गहरे राज़ छुपे होते है

तुम्हारी झुंझलाहट में भी कुछ मोह्ब्हत के पल होते हैं

और जब तुम फुसलाते हो तो भी कुछ अरमान होते हैं 

ठंडी-सुखी हवा के झोंकों में ही सही पतझड़ के भी रंग होते हैं


सपने तो देखते हैं सभी कुछ खुली आँखों से साकार होते हैं 

नशे में तो झूमते है हम भी कुछ बिना मय भी मदहोश होते हैं

भागते-दौड़ते परेशान है सभी कुछ पसीने में ही ख़ुश होते हैं 

गीली माटी में ही सही पतझड़ के भी रंग होते हैं


आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 062 o--


Tuesday, 28 December 2021

Re Kabira 0061 - हिसाब-किताब नहीं होना चाहिए

--o Re Kabira 061 o--

हिसाब-किताब नहीं होना चाहिए


 

यादें होनी चाहिए, बातें होनी चाहिए,

बातों में कुछ राज़ छुपे होना चाहिए,

कुछ किस्से होना चाहिए,

कुछ कहानियाँ होनी चाहिए,

दोस्तों में बस झूठ नहीं होना चाहिए


छेड़कानी होनी चाहिए, बदतमीज़ी होनी चाहिए,

बदतमीज़ी में कुछ हँसी मज़ाक होना चाहिए,

कुछ इशारे होना चाहिए, 

कुछ बातें इशारों में होना चाहिए,

दोस्तों में बस फ़रेब नहीं होना चाहिए


मिलने का बहाना होना चाहिए, मुलाकातों की ललक होनी चाहिए 

रोज़ महफ़िल में पीना-पिलाना होना चाहिए,

कुछ हँसना चाहिए, 

कुछ रोना चाहिए,

दोस्तों में बस इस्तेमाल नहीं होना चाहिए


झगडे होना चाहिए, लड़ाई होनी चाहिए,

हाथापाई में ग़लतफ़हमी दूर होनी चाहिए,

कुछ नोक-झोंक होना चाहिए,

कुछ गाली-गलोच होना चाहिए,

दोस्तों में बस इल्ज़ाम नहीं होना चाहिए


ख़्वाब होना चाहिए, खाव्हिशें होनी चाहिए,

ख़्वाबों में खाव्हिशें होनी चाहिए,

कुछ सपने होना चाहिए,

कुछ हक़ीक़त होनी चाहिए,

दोस्तों में बस हिसाब-किताब नहीं होना चाहिए


आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 061 o--

Friday, 19 November 2021

Re Kabira 060 - अभी तक कोई सोया नहीं

--o Re Kabira 060 o--

 

अभी तक कोई सोया नहीं 

सामने वाले घर में आज भी, अभी तक कोई सोया नहीं 

या तो वो गुम है क़िताबों में - अख़बारों में, या फिर खोया हुआ है ख़यालों में 

या तो वो हक़ीक़त से है अनजान, या फिर है बहुत परेशान 

या तो वो है बिल्कुल अकेला, या फिर जमा हुआ है दोस्तों का मेला 


सामने वाले घर में आज भी, अभी तक कोई सोया नहीं 

या तो वो है किसी से डरा हुआ, या फिर है हाथ में प्याला भरा हुआ 

या तो वो है किसी के इख़्तेयार में, या है किसी के इंतज़ार में 

या तो वह है बहुत ही थका हुआ, या चाह कर भी सो न सका 


सामने वाले घर में आज भी, अभी तक कोई सोया नहीं 

में भी तो अब तक सोया नहीं, नींद का कोई पता नहीं 


आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 060 o--


Wednesday, 17 November 2021

Re Kabira 059 - क्या ढूँढ़ते हैं ?

--o Re Kabira 059 o--




आप मेरी सुकून की नींद को मौत कहते हैं, और फिर अपने  ख्वाबों मे मुझे ढूँढ़ते हैं 

अजीब इत्तेफ़ाक़ है की आप मुझसे भागते हैं,और फिर साथ फुर्शत के दो पल ढूँढ़ते हैं 

कभी आप मेरे काम तो तमाशा कहते हैं, और फिर कदरदानों की अशर्फियाँ ढूँढ़ते हैं 

देखिये आप मुझे वैसे तो दोस्तों में गिनते हैं, और फिर मुझमें अपने फायदे ढूँढ़ते हैं 

कभी आप मेरे साथ दुनिया से लड़ने चलते हैं, और फिर दुश्मनों में दोस्त ढूँढ़ते हैं 

ओ रे कबीरा ! लिखते नज़्म गुमशुम एक कोने में, और फिर भीड़ में चार तारीफें ढूँढ़ते हैं


आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 059 o--

Wednesday, 15 September 2021

Re Kabira 058 - That Shadow of Mine

 --o Re Kabira 058 o--


I was a hollow frame, with that shadow of mine

my mother instilled beliefs in my mind

a teacher walked along and left trust behind

and a family reminded me of pride that outshined


I was a friend, with that shadow of mine

someone robbed me of my beliefs

I carried on with that trust & pride of mine

another robbed me of my trust


I carried on with my pride that once outshined

Yesterday I've been robbed again and left me with no pride

and I'm carrying on with a hollow frame of mine

don't know how to get rid of that shadow of mine

it's always following me behind,

that shadow of mine


-- Ashutosh Jhureley --


--o Re Kabira 058 o--

Monday, 4 January 2021

Re Kabira 057 - कहाँ चल दिये अभी तो बहुत सारी बातें बाँकी है

 


--o Re Kabira 057 o--

कहाँ चल दिये अभी तो बहुत सारी बातें बाँकी है
यहाँ कुछ यादें है, अभी तो सपने बुनना बाँकी है

अभी आधे रास्ते चले है सफ़र थोड़ा और बाँकी है 
सभी दीवारें तो बन गयी, घर की छत बनना बाँकी है

मिले दसियों यार-दोस्त, खुद से दोस्ताना बाँकी है 
पढ़े आपके बहुत शेर, अपनी ग़ज़ल सुनना बाँकी है

जहाँ देखो जल्दबाज़ी है, ज़रा सा सुस्ताना बाँकी है 
कहाँ भागे जा रहे हो, जो छूट गये उसे लेना बाँकी है

देखे तारे बहुत रात भर, अभी तोड़ कर लाना बाँकी है
सीखे ग़ुर बहुत उम्र भर, अभी चाँद को झुकाना बाँकी है 

लड़खड़ाये, सम्भल गए, पर बदलना अभी बाँकी है 
ज़माने ने सुनाया बहुत, पर जवाब देना अभी बाँकी है 

अब तक परख़े मख़मल, ख़ारज़ार पर चलना बाँकी है
अब तक पतझड़ देखा है, गुलों का खिलना बाँकी है

कभी कहते थे फिर मिलेंगे, आपका लौटना बाँकी है
अभी तक तुम ख़फ़ा हो, ग़लतफ़हमी मिटाना बाँकी है 

कब तक बारिश से बचोगे, भीगने का लुफ़्त बाँकी है
जब मिल ही गया इशारा, बस बेक़रार होना बाँकी है

कहाँ चल दिये अभी तो बहुत सारी बातें बाँकी है
यहाँ कुछ यादें है, अभी तो सपने बुनना बाँकी है

आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 057 o--

Total Pageviews