Saturday, 23 December 2017

Re Kabira 0027 - Giving दान दिये धन ना घटै

--o Re Kabira 0027 o--

चिड़ी चोंच भर लै गई, नदी घटया ना नीर। 
दान दिये धन ना घटै, कह गए दास कबीर।।
 
Translation: Even if a bird takes mouthful of water, water in the river doesn't diminish. Kabir says your wealth will not diminish by your charity.
 
My Interpretation: One doesn't become rich by accumulating, but becomes richer by giving.  

 --o संत कबीर दास  o--
--o Sant Kabir Das o--




--o Re Kabira 0027 o--

Friday, 22 December 2017

Re Kabira 0026 - Partial Facts जान बात अधूरी

--o Re Kabira 0026 o--



 
जान बात अधूरी, मत बनाओ प्रीत।  
तब परछाई दिखे, जब जले है दीप।।

jaan baat adhuri, mat banao preet
tab parchai dekhe, jab jale hai deep
   
Translation: You shouldn't make up your mind and favour anyone by knowing partial facts. You only see shadow when there is light.

--o आशुतोष झुड़ेले o--
--o Ashutosh Jhureley o--

--o Re Kabira 0026 o--

Sunday, 17 December 2017

Re Kabira 0025 - Carving (Greed) रुखा सूखा खायके

--o Re Kabira 0025 o--


रुखा सूखा खायके, ठण्डा पाणी पीब ।
देखि परायी चोपड़ी, मत ललचावै जीब ।।

rukha sukha khayke, thanda paani peeb
dekh paraye chopdi, mat lalchay jeeb

Translation: What ever limited you have, consume and be satisfied. You should not crave for what others have.

My Interpretation: Be happy with what you have...

--o Sant Kabir Das o--

--o Re Kabira 0025 o--

Friday, 15 December 2017

Re Kabira 0024 - तू है गज


--o Re Kabira 0024 o--


।। तू है गज ।।

तू है वन में, तू है मंदिर में...
तू है सड़कों पे, तू है तमाशों में...
तू है भजनों  में, तू है गीतों में...
तू है कविता में, तू है चित्रोँ में।

तू है वृक्षों का राजा, तू है दरियों का
बादशाह...
तू है राजाओं की शान, तू हैं महोट की जान...
तू है जीत का प्रतीक, तू है क्रांति का गीत...
तू है कबीर के दोहों में, तू है बुद्ध के बोलों में।

तू है युद्ध की हूंकार, तू हैं शांति की पुकार...
तू है ज्ञानियों के प्रेरणा, तू हैं ऋषियों की चेतना...
तू है हर पूजा में, तू है हर जीबा में...
तू है बचपन में, तू हैं अंतिम दर्शन में। 

तू है ऐरावत, तू है महमूद...
फिर क्यों... तू ही तड़पे, तू ही तरसे...
तू है अब सपनों में, तू है अब मन में...
तू हैं हमारी कोशिश, तू है हमारी
कोशिश में।

तू है गज, तू है गज, तू है गज।

-- आशुतोष झुड़ेले



--o Re Kabira 0024 o--


Wednesday, 18 October 2017

Re Kabira 0023 - शुभ दीपावली (2017)

--o Re Kabira 0023 o--

जय हो विजय हो, सुख हो समृद्धि हो | 
उन्नत्ति हो लाभ हो, शांति हो मंगल हो | | 
नव वर्ष हर्षित हो, दीपावली अतिशुभ हो | 
मंगल ही मंगल हो, सब मंगलमय हो || 

Ashutosh Jhureley

|| शुभ दीपावली || 
|| Wishing you a Happy Deepawali & New Year ||


--o Re Kabira 0023 o--

Wednesday, 11 October 2017

Re Kabira 0022 - शिकायत थी मुझको

--o Re Kabira 0022 o--

शिकायत थी मुझको !!!

शिकायत थी मुझे खुदसे, तुमसे और थी यारों से, 
शिकायत थी मुझे माता-पिता से, भाई-बहन और थी रिश्तेदारों से,
शिकयात थी मुझे साथी से, बच्चों और थी अपनों से,
शिकयत थी मुझे वर्त्तमान से, भूत-भविष्य और थी समय से,
शिकायत थी मुझे सभी से, आप से और थी भगवान से | 
शिकायत पर हँस पड़ा कबीरा, मुस्कुराया और बोला, मूरख !
शिकायत करते हैं वो, पास है जिनके सब कुछ और सभी,
शिकायत का मौका मिलता है उनको, जिनको पता नहीं कीमत शिकायत की | | 

-Ashutosh Jhureley

It's a privilege to be able to complain...

--o Re Kabira 0022 o--

Monday, 2 October 2017

Re Kabira 0021 - हरी हरे मेरे दश हरा

--o Re Kabira 021 o--


भजूं मैं हरी नाम सदा, हरी हरे मेरे 
दुश  इस "दशहरा" | 
विरोध करुँ मैं अमानवता का, हो कर्म मेरे स्वार्थ बिना |
क्रोध न भारी पड़े मस्तक पर, मत्सर न आये कभी विचारों में | 
काम-वासना से मुक्त हो जीवन, न दिखे लोभ जब में देखूं दर्पण |
न सहूँ न होने दूँ अन्याय, न ही झूमूँ डूब अहंकार में  |
मद न आये मेरे आचार में , मोह न डाले अड़चन मेरे व्यव्हार में  |  
भजूं मैं हरी नाम सदा, हरी हरे मेरे दुश इस "दशहरा" || 

"Happy Vijayadashami"

Ashutosh Jhureley

--o Re Kabira 021 o--


#अमानवता #Cruelty

#अहंकार #Ego
#अन्याय #Injustice
#काम-वासना #Lust
#क्रोध #Anger
#लोभ #Greed
#मद #Pride
#मोह #Attachment
#स्वार्थ #Selfishness
#मत्सर #Jealousy

Dussehra
Dus (दुश) meaning "bad, evil, sinful" and Hara (हर) means "removing, destroying", connoting "removing the bad, destroying the evil, sinful".




Tuesday, 23 May 2017

Re Kabira 0020 - Live and let live....



--o Re Kabira 020 o--


मुल्ला दे पांचो बांग, पंडा जापे पोथी पोथा |
कबीरा देख नयना खोल, सताये मानुष के दशा ।।
 Translation: Some pray to 5 times a day, others read & repeat holy scripts all day long... what is the point of doing so, just open your eyes & see state of humanity.

 -- Ashutosh Jhureley

#IAmKabira
live and let live......

#StopTheKillings
#LiveAndLetLive


--o Re Kabira 020 o--

Thursday, 18 May 2017

Re Kabira 019 - सोचता हूँ की बस सोचता ही न रह जाऊ? (Just Do It)


--o Re Kabira 019 o--



सोचता हूँ की बस सोचता ही न रह जाऊ?

सोचता हूँ क्या क्या करना हैं मुझको,
सोचता हूँ क्या करूँ सबसे पहले,
सोचता हूँ कब शुरुआत करूँ ?

सोचता हूँ कब कर पाऊँगा सब कुछ ,
सोचता हूँ क्या होगा न कर पाया ये सब,
सोचता हूँ क्या समय नहीं है मेरे साथ ?

सोचता हूँ कितने पैसे हैं मेरे पास,
सोचता हूँ इतने पैसे काफी होंगे या नहीं,
सोचता हूँ उतने पैसे कहाँ से लाऊंगा ?

सोचता हूँ क्या कहेंगे दोस्त अगर चल पड़ा,
सोचता हूँ क्या सोचेंगे घर पर यदि न कर सका,
सोचता हूँ बच्चे क्या बोलेंगे कुछ सालों के बाद?

सोचता हूँ क्या होगा घर-बार का,
सोचता हूँ क्या होगा धर-परिवार का,
सोचता हूँ क्या होंगे मेरा इन सब के बाद?

सोचता हूँ क्या करूँ क्या नहीं,
सोचता हूँ सोचा करूँ या नहीं,
सोचता हूँ की बस सोचता ही न रह जाऊ?

बस कर सोचना और सपने देखना,
बस उठा कदम और निकल जा,
बस रुकना मत चलते ही जा ||

-- आशुतोष झुड़ेले  



#DontThink #JustDoIt #ItsYourTime #DoIt #GoOn #HereYouGo


--o Re Kabira 019 o--

Tuesday, 2 May 2017

Re Kabira 018 - ROYAL BEASTS 15th Anniverssary Ride: BEASTERS Ride On !!!

--o Re Kabira 018 o--


Royal BEASTS 15th Anniversary Ride
Delhi – Binsar – Delhi
07-08-09/April/2017

BEASTERS Ride On !!!

with the thud and roar, BEASTERS Ride On ...
to the endless roads where sun seems to meet earth ...
to the invincible mountains where clouds are yours forever ...
to the serene blue water where ocean & seas come together ...



with the glitches and ditches, BEASTERS Ride On ...
to the location where some find their heart & soul ...
to the destination where they feel always belonged ...
to the gather where journey & celebrations never ends ...


with the blood and sand, BEASTERS Ride On ...
to the roads where others have travelled none honed ...
to the place where others have gone but not yet known ...
to the neighbourhood where only we created brotherhoods ...


with the storms and rain, BEASTERS Ride On ...
to create memories to be visited down the lane ...
to share stories that cannot go vain ...
to celebrate sores that never pain ...


with smoke and wine, BEASTERS Ride On ...
to drink that goes with, without water ...
to feed on dirt, mud, grease and butter ...
to sleep on road, shanty, shack and gutter ...


with Raja-Abhi-Chirag-Sushant, BEASTERS Ride On ...
to remember, commemorate and celebrate ...
to love, care and share ...
to live, life and beyond ...



some call it club, others’ gang, it’s a family and strain ...
some call it sane, others' insane, it's 15 years and going on ...
some ask why BEASTER, we say EVEN GOD’S A "BEASTER" ...
BEASTERS Ride On, BEASTERS Ride On, BEASTERS Ride On ...





ROYAL BEASTS
b. 6th April 2002
15 Years and on...

-- Ashutosh Jhureley, BEASTER

#RoyalBeasts #RoyalEnfield #BOBMC #NewDelhi #MotorCycle #Beasters

--o Re Kabira 018 o--

Monday, 3 April 2017

Re Kabira 017 - Sachin: Father's poetic tirbute to the greatest player...Sachin Tendulkar


--o Re Kabira 017 o--


Sachin
Father's poetic tirbute to the greatest player...Sachin Tendulkar

Intensity, concentration, spontaneity
Moods and tensions and form ...
Rhythm and movement and composition
And flashes of imagination and talent ...
When the strokes go across
To the boundary
Of all the things, that string of
Uncertainty hanging all the time
Making moment of every movement -
A creative moment
And a challenge
What else can all this be
If not a lyric on the playground?
Hence this vocabulary
Rushing up to me
As I sit down, Dear Sachin,
To describe your game.

Shri Ramesh Tendulkar

--o Re Kabira 017 o--

#Sachin #Tendulkar #SachinTendulkar #RameshTendulkar #Cricket #SachinPoem

Sachin Tendulkar on wikipedia
Sachin Tendulkar on ESPN Cricinfo
Sachin Tendulkar on Wisden

Friday, 24 March 2017

Re Kabira 016 - दर दर गंगे (Ganga)

--o Re Kabira 016 o--

 दर दर गंगे

 || दर दर गंगे ||

बोलो सब माई की जय, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
दूर होते जा रही गंगोत्री मैं, छल-छल  दर दर गंगे ॥

प्रीत जतलाते सब मैया पर, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
विचलित हो जाती ऋषकेश में, मंदिर-मंडप दर दर गंगे ॥

आते सब पाने शुद्धि मुक्ति, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
त्रिस्क़ृत होती हर पहर हरिद्धार में, पल-पल दर दर गंगे ॥

पवित्र करें सब गंगा जल से, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
डरे हुए हैं सब नरौरा में, बूँद-बूँद दर दर गंगे ॥

रुकते नहीं कदम किनारे चलते, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
थक गयी मैला धोते कानपूर में, नल-नाल दर दर गंगे ॥

आरती गाओ गंगा मैया की, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
बदहाल हो गयी वाराणसी में, पैड़ी-पैड़ी दर दर गंगे ॥

यहाँ जमघट हो लाखों का, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
तरस रही पानी को अलाहबाद में, तट-तट दर दर गंगे ॥

मांगे वरदान विकास का, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
सब जगह लुटी पटना में, पुल-पुल दर दर गंगे ॥

प्रेरित हुए सदियों से पट पर, चिल्ला-चिल्ला  हर हर गंगे ।
हृदय चुभोता इतिहास कोलकाता में, किल-कील दर दर गंगे ॥

देखेन चले सब सागर मिले गंगा में, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
गुम हो जाती मैया गंगासागर में, लहर-लहर  दर दर गंगे ॥

कहते हैं हम माँ जिसको, चिल्ला-चिल्ला हर हर गंगे ।
बाहते जा रही बस आसूँ , घाट-घाट दर दर गंगे ॥

करें हम रक्षा इसकी, चिल्ला-चिल्ला  हर हर गंगे ।
रखे मान सम्मान मैया का, हो ना-होगी ना दर दर गंगे ॥

Ashutosh Jhureley

Penned down few lines after reading and inspired by absolutely amazing book "Dar Dar Gange" by Abhay Mishra, Pankaj Ramendu. I have been to almost all of the place in the poem and was really touched by story told by Abhay & Pankaj in the book.

--o Re Kabira 016 o--

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