Tuesday, 5 January 2016

Re Kabira 010 - Martyr

--o Re Kabira 010 o--

चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!

---oo Pandit Makhan Lal Chaturvedi oo--

My Interpretation: Nothing comes ahead of service of motherland; it is privilege to be in service of motherland in one way or other. 


--o Re Kabira 010 o--
#salute #india #indianarmy #terroristattack #makhanlalchaturvedi

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