Inspirational Poets - Ramchandra Narayanji Dwivedi "Pradeep"

Ramchandra Narayanji Dwivedi "Pradeep" (कवि प्रदीप) was an Indian poet and songwriter who gave patriotic Hindi movies some songs that became larger calls. He adopted the pen name "Pradeep" and became renowned as Kavi Pradeep. His most famous song is "Aye Mere Watan Ke Logo" (ऐ मेरे वतन के लोगों), sung by Lata Mangeshkar, made then Prime Minister of India Pt. Nehru cry. Sharing my favorite poems of "Pradeep" here:


कभी धुप कभी छाँव
सुख दुःख दोनों रहते जिसमे जीवन है वो गाँव
कभी धुप कभी छाँव, कभी धुप तो कभी छाँव

भले भी दिन आते जगत में, बुरे भी दिन आते
कड़वे मीठे फल करम के, यहाँ सभी पते
कभी सीधे कभी उलटे पड़ते, अजब समय के पाँव
कभी धुप कभी छाँव, कभी धुप तो कभी छाँव

क्या खुशियाँ क्या गम, ये सब मिलते बारी बारी
मालिक की मर्ज़ी पे, चलती ये दुनिया सारी
ध्यान से खेना जग में, बन्दे अपनी नाव
कभी धुप कभी छाँव, कभी धुप तो कभी छाँव



कभी कभी खुद से बात करो
कभी कभी खुद से बात करो,कभी खुद से बोलो।
अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।
कभी कभी खुद से बात करो, कभी कभी खुद से बोलो।

हरदम तुम बैठे ना रहो.. शौहरत की इमारत में।
कभी कभी खुद को पेश करो आत्मा की अदालत में।
केवल अपनी कीर्ति न देखो.. कमियों को भी टटोलो।
कभी कभी खुद से बात करो, कभी कभी खुद से बोलो।

दुनिया कहती कीर्ति कमा के, तुम हो बड़े सुखी।
मगर तुम्हारे आडम्बर से, हम हैं बड़े दु:खी।
कभी तो अपने श्रव्य-भवन की बंद खिड़कियाँ खोलो।
कभी कभी खुद से बात करो, कभी कभी खुद से बोलो।

ओ नभ में उड़ने वालो, जरा धरती पर आओ।
अपनी पुरानी सरल-सादगी फिर से अपनाओ।
तुम संतो की तपोभूमिपर मत अभिमान में डालो।
अपनी नजर में तुम क्या हो? ये मनकी तराजू में तोलो।

कभी कभी खुद से बात करो, कभी कभी खुद से बोलो।

Most Loved >>>

Re Kabira 087 - पहचानो तुम कौन हो?

चलो नर्मदा नहा आओ - Re Kabira 088

Re Kabira 086 - पतंग सी ज़िन्दगी

Re kabira 085 - चुरा ले गये

Re Kabira 084 - हिचकियाँ

उठ जा मेरी ज़िन्दगी तू - Re Kabira 090

तमाशा बन गया - Re Kabira 089

Re Kabira 065 - वो कुल्फी वाला

Re Kabira 083 - वास्ता