Posts

Showing posts with the label कहानियाँ

कुछ किस्से कहानियाँ - बेंदी - Hindi Stories - Bendi - Re Kabira 116

Image
-- o Re Kabira 116 o -- बेंदी बब्बा के फूल अभी चुने नहीं थे, पर उनकी तिजोरी सभी भाइयों ने खोल दी। पता नहीं बब्बा ने सबसे छुपा कर या बचा कर उसमें क्या खजाना दबा रखा हो? वह तिजोरी नहीं, बब्बा की ढकी हुई प्रतिष्ठा थी—और जो निकला, वह उनकी वास्तविकता थी। एक, दो और पाँच रुपये के नए नोटों की एक-आधी गड्डियाँ, जो पापा बब्बा को त्योहार और व्यवहार के लिए दे आते थे, और थोड़ी चिल्लड़ । तिजोरी में कुछ चाँदी और पीतल के खिलौने और टूटे हुए जेवर भी थे। जेवर और खिलौने कबाड़ी के भाव बेच दिए गए, नोटों की गड्डियों को ताऊजी ने सभी भाइयों में बराबर बाँट दिया और चिल्लड़ बाई को दे दी।   बाई ने बड़बड़ाते और आँसू बहाते हुए वापस उनकी तरफ झटकार दी—“दो दिन भय नोइ, तुम औरन ने जो सुरु कर दौ।” मुझे बब्बा और बाई—यानि दादा और दादी—के साथ 10वीं, 11वीं, 12वीं के बाद और नौकरी ज्वाइन करने से पहले हर बार 2–3 महीने अकेले बिताने मिले। बाई तो बस लड़याती थीं, पर बब्बा के साथ रोज़ कई घंटे बातें होती थीं। हालाँकि भैया उनके सबसे प्रिय थे, मेरा उनसे अलग प्रेम था। सभी नाती‑पोतों में केवल मैं था जो उनसे पीटा था—वह भी ए...