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कुछ किस्से कहानियाँ - नियत - Hindi Stories - Intentions - Re Kabira 121

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नियत  जब मैं छुट्टियों में जबलपुर जाता था, तो मैं और बब्बा प्रतिदिन खाना खाने के बाद बहुत सारी बातें करते। कई बार घंटों, जब तक उन्हें नींद नहीं आ जाती। विषय कुछ भी हो सकता था — अख़बार की खबर, टीवी का कोई कार्यक्रम, पढ़ाई, रामायण और महाभारत की कई कहानियाँ, उनके किस्से, घर की पुरानी बातें, और कोई भी विषय। मुझे बब्बा के खाना खत्म करने का इंतज़ार रहता ताकि हम बातें कर सकें। बब्बा के पास बातों का खज़ाना था और मेरे पास सवाल का अंबार। कैसे उन्होंने साइकिल, बग्गी और फिर जीप चलाना सीखा और अब क्यों वे घर से बाहर ही नहीं निकलते। उनके गुरु ब्रह्मानंद सरस्वती की कहानियाँ। कैसे उनकी मित्रता अपने गुरुभाई महर्षि महेश योगी से हुई और उनके स्विट्ज़रलैंड बुलाने के न्योते। जब उन्हें Air India की "झाँसी की रानी" प्लेन से जाने का निमंत्रण आया था तो वे नहीं गए थे क्योंकि धर्मानुसार समुद्र पार करना पाप माना जाता था। और बहुत से किस्से, कहानियाँ और बातें। बब्बा का जन्म मानो सोने की चम्मच मुँह में लेकर हुआ था। इसलिए मेरे सवाल ज्यादातर उनके युवा या किशोरावस्था, पापा और चाचाओं के बचपन और घर के रोज़ के कले...