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Hindi Poem - Aadit is 18 - १८ का आदित - Re Kabira 126

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आदित, अब हो गए हो तुम १८ के, अब बच्चे नहीं, लड़के नहीं,  कहलाओगे व्यस्क युवक! तुमसे हम बोलेंगे, क्यों अभी भी इतनी शैतानी करता है? अब तो थोड़ा ज़िम्मेदार होना बनता है? क्यों नहीं अब पापा की सुनता है? और अभी भी मम्मी के बिना तेरा काम  क्यों नहीं चलता है? पर तुम अपना, बचपना दिल में हमेशा साथ रखना, नटखटाहट को जेब में लेकर चलना, नए दोस्त बनाना, नई जगहों को जाना, बिना डरे, बस आगे कदम बढ़ाते जाना। तुम अपनी, उछालों से गगन के उस पार चाँद को छूना, आँधियों पर हो सवार बादलों को चूमना, अपने सारे सपनों को तितलियों संग बुनना, अपनी दुनिया में खुशियों के खूब रंग भरना। आदित, अब हो गए हो तुम १८ के, अभी तो नया सफ़र शुरू हुआ है, अब तो तुझे बड़ा होने का असली मौक़ा मिला है, अब अपनी नई आज़ादी को  सही दिशा में ले जाओ, और कल को अपना बनाओ।  और यदि, कभी डर लगे, घबराहट हो, कदम डगमगायें, तो याद रखना, अदिति तेरे पीछे है चले,  तेरी मम्मी हमेशा तुझे पास है मिले, और जहान में कही भी, कभी भी,  तेरे पापा तेरे साथ हैं खड़े। खूब खेलो, खूब पढ़ो, खूब बढ़ो, खूब ख़ुश रहो! ऐसे ही बने रहो आदित!!! आशुत...