कुछ किस्से कहानियाँ - वो सिक्के - Hindi Stories - Those Coins - Re Kabira 117
वो सिक्के "सुबह रेडियो बंद हो गओ, सेल लेते आना और बदल देना" - मैं चाचा की साइकिल निकालकर भंवरताल अपने दोस्त के घर जा रहा था तो बब्बा ने याद दिलाया। दोस्तों के साथ डेढ़-दो घंटे घूमने-फिरने के बाद घर आते समय, तिगड्डे पर किराना दूकान से दो सेल और पार्ले बिस्कुट का पैकेट खरीद लिया। चाचा लोग चाय पी रहे थे, उनके साथ चाय बिस्कुट मैं भी खाने लगा ही था कि बब्बा ने सेल लेकर नीचे बुलाया। ज्यों हमने रेडियो के सेल बदले त्यों आकाशवाणी पर समाचार शुरू हो गए। खाना खाने के बाद बब्बा और मैं अक्सर बतियाते थे, जो भी विषय सामने आजाये उस पर बातें शुरू हो जाती। जैसे कल हमने धनुषधारी मंदिर के बारे में बात शुरू की, फिर बब्बा ने रामायण खोल एक अध्याय पढ़ा। पहले मुझे पढ़ने दिया, ढंग से नहीं पढ़ा तो ख़ुद ही पढ़ कर बताया। उससे पहले मैंने टेबल टेनिस के बारे में उन्हें बताया, कैसे खेलते हैं, नियम, मैं कहाँ सीखने जाता, कौन सिखाता वगैरह। कभी वो अपने किससे सुनाते, कभी मेरी सुनते। कुछ नहीं मिलता तो अखबार तो था ही, नहीं तो बब्बा के कुछ देर पैर खोंद कर सोने चला जाता। उस दिन थोड़ी देर पहले जो रेडियो से पुराने सेल ...