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Hindi Memoir- Diwali of Milloniganj - हिंदी संस्मरण - मिलौनीगंज की दिवाली - Re Kabira 0137

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मिलौनीगंज की दिवाली 09/Oct/2026 मिलौनीगंज के उस पुराने घर में दिवाली कभी सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं होती थी; वह तो एक पूरा बीस दिनों का उत्सव था, जो हमारे बड़े से घर और बिखरे परिवार को कुछ दिनों के लिए एक साथ ले आता था। जैसे ही नवरात्रों की रौनक कम होने लगती, दिवाली की तैयारियाँ शुरू हो जातीं। गुड़हाई तिराहे से पंडाल सिमटने लगते और दशहरे के पुतलों की झाँकी निकली ही होती थी कि बब्बा चाचाओं को उन दीवारों को दिखला देते जहाँ मरम्मत की ज़रूरत होती और इशारा करते जहाँ से चूने की पपड़ी झड़ रही होती। "यहाँ अभी छपाई-पुताई बाकी है।" इसके बाद अगले 20 दिनों तक घर में सफाई और सजावट का अभियान छिड़ जाता। पूरा घर उथल-पुथल हो जाता। चारों तरफ एक निरंतर उत्साह का शोर छा जाता। हवा में गीले चूने की महक, धूल-ही-धूल और सालों-साल के दबे विवाद हर साल की तरह फिर निकल आते। दादी, मम्मी, बुआ और चाचियाँ पीतल-काँसे के हांडी-बर्तनों को चमकाने में लग जातीं; बड़बड़ाते हुए ही सही, पुराने पतीले और बर्तन फिर से नए हो जाते। छत पर एक अलग ही नज़ारा होता। धूप सेकने के लिए तकिए, रजाई और गद्दे कतार में बिछा दिए जाते औ...

कुछ किस्से कहानियाँ - बेंदी - Hindi Stories - Bendi - Re Kabira 116

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-- o Re Kabira 116 o -- बेंदी बब्बा के फूल अभी चुने नहीं थे, पर उनकी तिजोरी उनके सभी बेटों ने खोल दी। पता नहीं बब्बा ने सबसे छुपा कर या बचा कर उसमें क्या खजाना दबा रखा हो? वह तिजोरी नहीं, बब्बा की ढकी हुई प्रतिष्ठा थी—और जो निकला, वह उनकी वास्तविकता थी। एक, दो और पाँच रुपये के नए नोटों की एक-आधी गड्डियाँ, जो पापा बब्बा को त्योहार और व्यवहार के लिए दे आते थे, और थोड़ी चिल्लड़ । तिजोरी में कुछ चाँदी और पीतल के खिलौने और टूटे हुए जेवर भी थे। जेवर और खिलौने कबाड़ी के भाव बेच दिए गए, नोटों की गड्डियों को ताऊजी ने सभी भाइयों में बराबर बाँट दिया और चिल्लड़ बाई को दे दी।   बाई ने बड़बड़ाते और आँसू बहाते हुए वापस उनकी तरफ झटकार दी—“दो दिन भय नोइ, तुम औरन ने जो सुरु कर दौ।” मुझे बब्बा और बाई—यानि दादा और दादी—के साथ 10वीं, 11वीं, 12वीं के बाद और नौकरी ज्वाइन करने से पहले हर बार 2–3 महीने अकेले बिताने मिले। बाई तो बस लड़याती थीं, पर बब्बा के साथ रोज़ कई घंटे बातें होती थीं। हालाँकि भैया उनके सबसे प्रिय थे, मेरा उनसे अलग प्रेम था। सभी नाती‑पोतों में केवल मैं था जो उनसे पीटा था—वह ...