Hindi Poem - Autumn Sun - हिंदी कविता - पतझड़ की धूप - Re Kabira 0138
पतझड़ की धूप मेरे मन से खेलती, पल चेहरे पर गिरती, पल में ओझल हो जाती, मानो मन टटोलती, याद दिलाती, और फिर मीठे स्वर कान में फुस-फुसाती सुनो! "मैं तुम्हारे मन के वो विचार हूँ जो तुमने कहानी में गढ़े नहीं! मैं तुम्हारे मन के वो फूल हूँ जो तुमने माला में पिरोए नहीं! मैं तुम्हारे मन के वो रंग हूँ जो तुमने चित्रों में भरे नहीं! मैं तुम्हारे मन के वो पल हूँ जो तुमने जीवन में जीए नहीं!" शांत मन कर देती है शामक; वो नरम, वो गरम... पतझड़ की धूप! आशुतोष झुड़ेले 'ओ रे कबीरा' Ashutosh Jhureley 'O Re Kabira' @OReKabira -- o Re Kabira 138 o -- #जबलपुर #हिंदी #कविताकोष #कहानियाँ #यादें # धूप #jabalpur #hindi #memoir #memories #sun #autumn