Posts

thoughts..

Re Kabira - सर्वे भवन्तु सुखिनः (Sarve Bhavantu Sukhinah)

Image
2022 was supposed to be the year to restore and rebuild but things didn't go as I thought should have been. Another tough year, most difficult on all fronts - personal, professional, health & financial.  The year 2022 took a toll on both mind and well-being. There were some "leave me alone" moments, trust me those were not good at all.  A lot of time I was left alone on my own, and those were even worse. People think that being alone or leaving someone alone helps, its a misconception - there is a differnce between positive-time alone and negative-time alone.  Cancer took a dear friend and batchmate away, and I was gutted as couldn't meet him. He wanted to be left alone and I could only plan to meet him. A couple of close ones have been diagnosed and are battling the evil disease. They won't be left alone. लड़ाई अपनी अपनी होती है, खुद को ही लड़ना होती है  उम्मीद की कोई और लड़ेगा, फ़िज़ूल खर्च लड़ाई होती है  Every one has to fight their own battles !!! It was roll-co

Re Kabira 078 - ऐसे कोई जाता नहीं

Image
    --o Re Kabira 078 o-- ऐसे कोई जाता नहीं आज फिर आखों में आँसू रोके हूँ, आज तो मैं रोऊँगा बिल्कुल नहीं आज मैं और भी ख़फ़ा हूँ, आज मैं चुप रह सकता बिल्कुल नहीं  जाना तो है सबको एक दिन, पर ऐसे जाने का हक़ तुझको था ही नहीं बहुत तकलीफ़ हो रही है, पर आँसू बहाने की मोहलत मिली ही नहीं  बिछड़ने के बाद पता चला, फ़ासले सब बहुत छोटे हैं कोई बड़ा नहीं हमेशा की तरह पीछे-अकेले छोड़ गया, देखा मुझे पीछे खड़ा क्यों नहीं इतनी शिकायतें है मुझको, पर अच्छे से लड़ने का मौक़ा तूने दिया ही नहीं ग़ुस्सा करने हक़ है मेरा, पर किस को जताऊँ तू तो  अब   यहाँ है ही नहीं वो ठिठोलियाँ, वो छेड़खानियाँ, फ़र्श पर लोट-लॉट कर हँसना, याद करूँ या नहीं? केवल खाने की बातें, खाने के बाद मीठा, और फिर खाना, याद करूँ कि नहीं? वो साथ लड़ी लड़ाइयाँ, रैगिंग के किस्से,  छुप कर सुट्टे, याद करने के लिए तू नहीं  बिना बात की बहस, टॉँग खीचना, मेरी पोल खोलने वाला अब कभी मिलेगा नहीं  आँखें बंद करूँ या खोल के रखूँ, तेरा मसखरी वाला चेहरा हटता ही नहीं खिड़की से बाहर काले बादल छट गए, फिर भी तू दिखता क्यों नहीं  रह-रह कर याद आते है हर एक पल, फिर म

Re Kabira 077 - लड़ाई

Image
--o Re Kabira 077 o-- लड़ाई सब लड़ रहे कोई न कोई लड़ाई कुछ चारों छोर से  किसी की है अपने आप से लड़ाई तो किसी की और से   ज़रूरी नहीं कि दिखे चोटों में, या फिर टूटी चौखटों में छिप जाती हैं अधिक्तर लड़ाई, मुस्कुराते मुखौटों में अगर मैं नहीं लड़ूँगा अपनी लड़ाई, तो और कौन  सबको लड़नी खुद की लड़ाई, बाँकी सारे मौन   झंझोड़ देती, तो कभी निचोड़ देती, पर लड़ना मजबूरी है क्यों घबड़ाता है लड़ने से, ओ रे कबीरा लड़ते रहना ज़रूरी है लड़ाई अपनी अपनी होती है, खुद को ही लड़ना होती है  उम्मीद की कोई और लड़ेगा, फ़िज़ूल खर्च लड़ाई होती है आशुतोष झुड़ेले Ashutosh Jhureley @OReKabira   --o Re Kabira 077 o--

Re Kabira 076 - एक बंदर हॉस्टल के अंदर

Image
    --o Re Kabira 076 o-- हमेशा मुस्कुराता, हमेशा चहकता, इधर फुदकता, उधर कूंदता,  हाथों में जो आता, अक्सर टूट ही जाता, हमेशा खिलखिलाता, हमेशा नटखट, छेड़खानी करता, मसखरी करता, चंचल, मनचला,  जो मन में आता वो कह जाता  हमेशा दिखता था जोश में, हमेशा बोलता था जोश से, मिलता था पूरे जोश में, घुलता था पूरे जोश  से , यादों में रह गया उसका मदहोश करने वाला जोश, हमेशा जोश में जिया, जोश से ही लड़ा, आख़िर तक न छोड़ा जोश का साथ, कह गया बड़ी आसानी से...  मेरे दोस्त, जब तक है होश लगा दूंगा पूरा जोश  बोला ...  तुम बस इतना काम करना, जब बातें करो,  मेरे चुटकुले दोहराना, बार बार मसखरी याद दिलाकर हँसाना, पर ये कभी न पूँछना, कैसा हूँ? जब मिलो, एक बार बिना मतलब की होली जरूर खिलाना, कुछ खिड़की के काँच भी तोडूंगा, नाचेँगे, गायेंगे, शोर मचायेंगे, सीटीयाँ बजायेँगे पर ये कभी न पूँछना, कैसा हूँ? क्यों की..  मेरे दोस्त, जब तक है होश लगा दूंगा पूरा जोश एक पल शांत न बैठ सका,  उचकता, कूंदता, भागता, दौड़ता, हरकत करता, बकबक करता, कहते थे हम सब - एक बंदर हॉस्टल के अंदर   लपककर जो खुशियां पकड़ लाता,  यादों में भी रह रह कर हँसता, खि

Re Kabira 075 - क्षमा प्रार्थी हूँ

Image
    --o Re Kabira 075 o-- क्षमा प्रार्थी हूँ, था मस्तक पर स्वार्थ चढ़ा, मेरी वाणी में था क्रोध बड़ा  हृदय से न मोह उखड़ा, मेरी चाल में था अहँकार बड़ा क्षमा प्रार्थी हूँ, था में निराशा में खड़ा, मेरी बातों में था झूठ बड़ा आलस्य में यूँ ही था पड़ा, मेरे विचारों को था ईर्ष्या ने जकड़ा क्षमा प्रार्थी हूँ, था मद जो मेरे साथ खड़ा, मेरी सोच को था लोभ ने पकड़ा  क्षमा माँगने में जो देर कर पड़ा, नत-मस्तक द्वार में खड़ा  क्षमा प्रार्थी हूँ,  क्षमा का है व्यव्हार बड़ा, दशहरा का है जैसे त्योहार बड़ा क्षमा का है व्यव्हार बड़ा, दशहरा का है जैसे त्योहार बड़ा सियावर रामचंद्र की जय !! ... दशहरा पर आप सब को शुभकामनायेँ ... आशुतोष झुड़ेले Ashutosh Jhureley @OReKabira   --o Re Kabira 075 o--

Re Kabira 074 - भाग भाग भाग

Image
  --o Re Kabira 074 o-- भाग भाग भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग भाग तेज़ भाग, भाग तेज़ भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग और तेज़ भाग, और तेज़ भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग इधर भाग, उधर भाग, बस भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग गिर फिर उठ, उठ फिर भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग ठोकर से न रुक, चोट से न चूक भाग भाग भाग, भाग भाग भाग दिन भर भाग, रात भर भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग चोरी कर भाग, धोखा देकर भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग कुचल कर भाग, धकेल कर भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग धुप में, ठण्ड में, बारिश में भाग   भाग भाग भाग, भाग भाग भाग बीमारी में भाग, लाचारी में भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग भूखे थके भाग, थके भूखे भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग सो जाग खा भाग, खा सो जाग भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग कोई न रोके, कोई न टोके भाग भाग भाग, भाग भाग भाग अकेले ही भाग, सबको ले भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग साँसे उखड़े भाग, टांगे टूटे भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग हँसते रोते भाग, रोते गाते भाग भाग भाग भाग, भाग भाग भाग भाग, भाग कहाँ पहुँचना हैं?, है पता तुझको? भाग, भाग क्या छूटा?, है पता तुझको? भाग भाग क्या पाया?, है पता तुझक

Re Kabira 073 - ख़रोंचे

Image
  --o Re Kabira 073 o-- ख़रोंचे किसको ज़रूरत है काँटीले तारों की, वैसे ही बहुत ख़रोंचों के निशाँ है जिश्म पर किसको चाहिये ख़्वाब भारी चट्टानों से, ज़िन्दगी की लहरों ने क्या कम तोड़ा है टकरा कर   किसको जाना धरा की दूसरी छोर तक, चार कदमों का फासला ही काफी है चलो अगर किसको उड़ना है आसमान के पार, बस कुछ बादल चाहिये हैं जो बरसे जम कर किसको बटोरना है दौलत सारे जहाँ की, चकाचक की होड़ मे सभी लगे हुये हैं देखो जिधर  किसको इकट्ठे करने सहानुभूति दिखाने वालों को, चारों ओर हज़ारों की भीड़ है सारे बुत मगर किसको चाह है किसी कि दुआ की, लगता है बद-दुआ ही है जिसका हुआ असर  किसको सहारा चाहिये मदहोशी का, ये अभिमान का ही तो नशा है जो चढ़े सर किसको हिसाब चाहिये हर पल का, थोड़ा वक़्त तो निकाल सकते हैं साथ एक पहर किसको लूटना है वाह-वाही सब की, कभी-कभी तो हम बात कर सकतें हैं तारीफ़ कर किसको पढ़ना है कवितायेँ शौर्य-सुंदरता की, बस एक शब्द ही काफी है शुक्रिया-धन्यवाद कर  किसको ज़रूरत है काँटीले तारों की, वैसे ही बहुत ख़रोंचों के निशाँ है जिश्म पर आशुतोष झुड़ेले Ashutosh Jhureley @OReKabira   --o Re Kabira 073 o--

Re Kabira 072 - बातें हैं बातों को क्या !!!

Image
--o Re Kabira 072 o-- बातें हैं बातों को क्या  बातों बातों में निकल पड़ी बात बातों की,  कि बातों की कुछ बात ही अलग है  मुलाकातें होती हैं तो बातें होती हैं, फिर मुलाकातों की बातें होती है और मुलाकातें न हो तो भी बातें होती है देखे तो नहीं, पर बातों के पैर भी होते होंगे, कुछ बातें धीरे की जाती हैं, कुछ तेज़, कुछ बातें दबे पाँव निकल गयी तो दूर तक पहुँच जाती हैं  कुछ बातें दिल को छु कर निकल जाती हैं, और कभी सर के ऊपर से  कुछ बातें तो उड़ती-उड़ती, और कभी गिरती-पड़ती बातें आप तक पहुँच ही जाती है  बातों के रसोईये भी होते होंगे, जो रोज़ बातें पकाते हैं  कुछ लोग मीठी-मीठी बातें बनाते हैं, कुछ कड़वी बातें सुना जातें हैं कभी आप चटपटी बातें करते हैं, तो कभी मसालेदार बातें हो जाती हैं   और कुछ बातें तो ठंडाई जैसी होती है, दिल को ठंडक पहुंचा जाती हैं  वैसे तो अच्छी बातें, बुरी बातें, सही बातें और गलत बातें होती  हैं बातों का वजन भी होता है, कुछ हलकी होती हैं तो कुछ बातें भारी हो जाती हैं यूं तो कुछ लोग बातें छुपा लेते, तो  कुछ  बातों को रखकर चले जाते हैं, कोई दबा देता है,  और   फिर कोई आकर बातों तो उछाल ज