तमाशा बन गया - Re Kabira 089

--o Re Kabira 089 o--


तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी ज़िन्दगी का मसला बन गया,
रह-रह कर बढ़ते-बढ़ते मेरे जनाज़े का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी बात-चीतों का करारनामा बन गया,
रह-रह कर सीखते-सीखते मेरी बेख़बरी का तमाशा बन गया 

पता नहीं कैसे मेरी रस्म-ओ-राह का फायदा-नुक्सान बन गया,
रह-रह कर कुचलते-कुचलते मेरे उसूलों का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी नाराज़गी का इन्तेक़ाम बन गया,
रह-रह कर छुपते-छुपते मेरे किस्सों का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी दोस्ती का मक़बरा बन गया,
रह-रह कर गिरते-गिरते मेरे मायने का तमाशा बन गया 

पता नहीं कैसे मेरी गुहार का शोर बन गया,
रह-रह कर बहते-बहते मेरे आँसुओं का तमाशा बन गया 

पता नहीं कैसे मेरी हक़ीक़त का झूठ बन गया,
रह-रह कर ढकते-ढकते मेरे परदे का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी सोच का ताना बन गया,
रह-रह कर खड़े-खड़े मेरे ख़्वाबों का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी कहानी का नाटक बन गया,
रह-रह कर हसँते-हँसते मेरे अस्तित्व का तमाशा बन गया

पता नहीं कैसे मेरी चार-दीवारी का खंडहर बन गया,
रह-रह कर घटते-घटते मेरे हादसों का तमाशा बन गया 

पता नहीं कैसे मैं आदमी से बुत बन गया,
रह-रह कर देखते-देखते मैं इक तमाशा बन गया



आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley
@OReKabira

--o Re Kabira 089 o-- 

Most Loved >>>

चलो नर्मदा नहा आओ - Re Kabira 088

Re Kabira 087 - पहचानो तुम कौन हो?

Re Kabira - सर्वे भवन्तु सुखिनः (Sarve Bhavantu Sukhinah)

Re Kabira 084 - हिचकियाँ

उठ जा मेरी ज़िन्दगी तू - Re Kabira 090

Re Kabira 055 - चिड़िया

Re Kabira 086 - पतंग सी ज़िन्दगी

Re Kabira 083 - वास्ता

Re Kabira 046 - नज़र