Hindi Poem - Tearsmith - हिंदी कविता - अश्रु-गढ़िया - Re Kabira 0135
अश्रु-गढ़िया
अगर अश्रु सच में मोती होते,
तो लुट रहे होते,
कोई छीन लेता,
कोई चुरा लेता,
जिसका जैसा ढंग होता, वैसे —
मेरे विचारों को,
मेरे सपनों को,
मेरे भावों को,
मेरी भावनाओं के कुएँ को
सुखा देता, खाली कर देता।
न सुख होता,
न दुःख होता,
नम न होतीं प्रेम से आँखें,
शायद सागर इतना गहरा न होता।
जब मेरा मन पसीज जाता,
खीज से तिलमिलाता,
आनंदित हो झूमता,
तो गढ़वाने पड़ते अश्रु,
महँगा बहुत सौदा होता,
