Hindi Poem - Those Coins, Those Old Coins - वो सिक्के, वो पुराने सिक्के - Re Kabira 118

कुछ किस्से कहानियाँ - वो सिक्के - Hindi Stories - Those Coins - Re Kabira 117

वो सिक्के, वो पुराने सिक्के !!!

चाँदी, तांबे, कांसे के, थे कुछ पीतल के, 
छोटे-बड़े, गोल-चौकोर, थे कुछ छिदे सिक्के,
पुराने हैं, बाजार में जो बिकेंगे वजनों से,
खोटे नहीं, महत्व है जो जोड़ो भावनाओं से,
अहमियत नहीं उनकी खरीदने की क्षमता की, 
तुम नहीं जान सकोगे कीमत दो-चार आने की,
इसलिए पूँछ रहा हूँ, कहाँ हैं मेरे हिस्से के वो सिक्के, वो पुराने सिक्के?

एक तरफ है सच, दूसरी तरफ झूठ,
है विश्वास, पलटे धोखा है धूर्त, 
सीधा गिरे तो मान उल्टा पड़े अपमान होगा, 
है नदिया की धारा तो तट भी होगा,
जो उछालो तो नहीं केवल चित या पट तेरे हिस्से,
नियत तय करती नियति, हैं कितनो के किस्से,
इसलिए सोचता हूँ, क्यों चुरा लिए मेरे हिस्से के वो सिक्के, वो पुराने सिक्के?

छीन लोगे, चुरा लोगे, छुपा लोगे
मेरे हिस्से के वो सिक्के, वो पुराने सिक्के !!!
क्या करोगे उसका जो सीख दे गए
मेरे हिस्से के वो सिक्के, वो पुराने सिक्के?



आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley
@OReKabira

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