Hindi Poem - We Come To Meet You - हम मिलने आते हैं - Re Kabira 119


हम मिलने आते हैं


हम मिलने आते हैं

चलो सैर कर आते हैं, थोड़ी बातें कर आते हैं,
कई दिन हो गए निकले, थोड़ा टहल आते हैं...

अरसे से व्यस्त हैं, कुछ पल बिता साथ आते हैं,
मौसम का मिज़ाज अच्छा है, उठाकर लुत्फ़ आते हैं...

बेचैनी-सी मन में है, खुली हवा में साँस ले आते हैं,
थोड़ी बहुत ही सही, बटोर ताज़गी घर ले आते हैं...

रोज़ की जद्दोजहद छोड़, खोज सुकून आते हैं,
मौक़ा मिला है तो बाग़ीचे में सेक धूप आते हैं...

शोर-शराबे से बच, कोयल की कूक सुन आते हैं,
भीड़-भड़ाके से दूर, घूम एकांत गली में आते हैं...

रात के अँधेरे में टूटते सितारों को सुना चाहतें आते हैं,
और अगर,
गुम गए तो लपेट जुगनुओं की तिमतिमाहट ले आते हैं...

बहा मन की चिड़चिड़ाहट नदिया में आते हैं,
कोलाहल से छुप, सुन झरनों के गीत आते हैं...

यूँ ही भटक रहे हैं, देखो अब लौट घर आते हैं,
गुम गया जो बचपना, उससे फिर मिल आते हैं...

अट्टू गुदा होगा आँगन में, ढूँढ चिएँ खेल आते हैं,
पतंगों की महफ़िल में हम भी पेंच लड़ा आते हैं...

पापा के साथ मंडी से चुन सब्जियाँ ले आते हैं,
मम्मी के खाने की खुशबू आई - साथ बैठ खा आते हैं...

बिखरी हुई यादों को हार में पिरो, समेट लाते हैं,
सपने जो उधड़ गए, रंगीन धागों से बुन आते हैं...

दूर हो गए कैसे हम, खींच तुझे पास ले आते हैं,
अगली-पिछली छोड़, सँवार आज को आते हैं...

ठहरी हुई खुशियों को ज़रा धक्का लगा आते हैं,
और छान मुट्ठी भर मीठी यादें ले आते हैं...

  मैंने खुद को गले लगा कहा,
ओ मेरी ज़िंदगी, तुझसे हम मिलने आते हैं,
ओ रे कबीरा! तुझसे हम मिलने आते हैं !!!


आशुतोष झुड़ेले
Ashutosh Jhureley
@OReKabira

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